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सम्मान का महत्व क्या है?
जीवन की सबसे बड़ी सीख यही है कि सम्मान जरूरी है, चाहे कोई छोटा हो या बड़ा। अक्सर हम ताकत और पद के घमंड में दूसरों को छोटा समझने लगते हैं, लेकिन असली महानता दूसरों को आदर देने में है। चंदन वन की यह कहानी हमें सिखाती है कि हर जीव की अपनी एक गरिमा होती है। सम्मान (Respect) की भावना ही एक स्वस्थ समाज और जंगल की नींव रखती है। आइए जानते हैं शेरू और छोटी की यह अद्भुत कहानी।
चंदन वन का राजा: शेरू
एक बहुत ही घना और खुशबूदार जंगल था, जिसका नाम था 'चंदन वन'। यहाँ के पेड़ों से हमेशा एक मीठी महक आती रहती थी। इस जंगल का राजा एक विशाल शेर था, जिसका नाम था शेरू। शेरू बहुत बलशाली था और उसकी एक खास पहचान थी—उसकी अयाल (गर्दन के बाल) में एक प्राकृतिक 'चाँदी जैसा चमकता धागा' (Silver Streak) था।
शेरू को अपनी ताकत पर बहुत गर्व था। वह अक्सर दूसरे जानवरों का मज़ाक उड़ाता था। वह कहता, "इस जंगल में केवल वही जीवित रहने लायक है जो बड़ा और ताकतवर है। ये छोटे-मोटे जीव तो बस पैरों के नीचे कुचलने के लिए हैं।" शेरू की इस बात से जंगल के हाथी, हिरण और यहाँ तक कि छोटे पक्षी भी दुखी रहते थे।
छोटी चींटी का स्वाभिमान
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उसी चंदन वन के एक पुराने बरगद के नीचे चींटियों की एक बड़ी बस्ती थी। उनकी मुखिया थी 'छोटी'। छोटी बहुत ही बुद्धिमान और साहसी चींटी थी। उसकी पीठ पर एक छोटा सा 'पीला निशान' (Yellow Dot) था, जिससे उसे दूर से ही पहचाना जा सकता था।
एक दिन जब शेरू अपनी गुफा के बाहर सो रहा था, छोटी और उसकी सहेलियाँ वहाँ से गुज़र रही थीं। शेरू की नींद टूट गई और वह गुस्से में दहाड़ा, "ऐ तुच्छ जीवो! तुम मेरे रास्ते में क्या कर रही हो? अगर मैंने एक पैर भी रखा, तो तुम्हारी पूरी बस्ती का नामोनिशान मिट जाएगा।"
छोटी डरी नहीं, उसने अपनी नज़रें शेरू की आँखों में डालीं और कहा, "महाराज, आप बड़े हैं इसका मतलब यह नहीं कि आप हमें तुच्छ कहें। इस जंगल में रहने का जितना हक आपका है, उतना ही हमारा भी है। सबके लिए सम्मान जरूरी है।"
शेरू ज़ोर से हँसा और बोला, "सम्मान? तुम जैसों का सम्मान? चलो यहाँ से, वरना मेरा पैर तुम्हारा भविष्य तय कर देगा।"
जब संकट ने घेरा शेरू को
कुछ दिन बीत गए। चंदन वन में शिकारी आए थे। उन्होंने शेरू को पकड़ने के लिए एक बहुत ही बारीक और मज़बूत 'तारों वाला जाल' बिछाया था। शेरू अपनी मस्ती में चल रहा था कि अचानक वह उस जाल में फँस गया। वह जितना हाथ-पाँव मारता, जाल की तारें उसके शरीर में उतनी ही गहराई से धँसती जातीं।
शेरू ने बहुत कोशिश की, अपनी पूरी ताकत लगा दी, लेकिन वह मज़बूत जाल नहीं टूटा। वह दर्द से कराहने लगा। उसने जंगल के बड़े जानवरों को पुकारा, "हाथी भाई, मेरी मदद करो! गेंडे भाई, मुझे बचाओ!"
हाथी और गेंडा आए तो सही, लेकिन जाल इतना बारीक और पेचीदा था कि उनके बड़े पैर उसे छू भी नहीं पा रहे थे। हाथी ने कहा, "महाराज, हमारे पैर बहुत बड़े हैं, हम इन बारीक तारों को नहीं काट सकते। हमें डर है कि अगर हमने खिंचाव किया, तो तारें आपके शरीर को और चोट पहुँचाएंगी।"
छोटे जीवों का बड़ा कारनामा
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शेरू अब निराश हो चुका था। उसे अपनी मौत सामने दिखाई दे रही थी। तभी उसे एक छोटी सी आवाज़ सुनाई दी, "घबराइए नहीं महाराज, हम आ गए हैं।"
उसने नीचे देखा, छोटी चींटी अपनी हज़ारों साथियों के साथ वहाँ खड़ी थी। शेरू ने रुआँसे होकर कहा, "छोटी, तुम इतनी छोटी होकर इस मज़बूत जाल का क्या करोगी? बड़े-बड़े जानवर हार मान चुके हैं।"
छोटी ने कहा, "महाराज, याद रखिये, कभी-कभी जहाँ सुई काम आती है, वहाँ तलवार काम नहीं आती।"
छोटी के इशारे पर हज़ारों चींटियाँ उस जाल पर चढ़ गईं। उन्होंने अपनी तेज़ और छोटी-छोटी दांतों से उन बारीक तारों को धीरे-धीरे काटना शुरू किया। घंटों की मेहनत के बाद, उन्होंने जाल के मुख्य हिस्से को इतना कमज़ोर कर दिया कि शेरू ने एक झटका मारा और वह आज़ाद हो गया।
शेरू की आँखों से गिरा पर्दा
आज़ाद होते ही शेरू की आँखों में आँसू आ गए। वह छोटी चींटी के सामने झुका और बोला, "छोटी, आज तुमने मेरी जान ही नहीं बचाई, बल्कि मेरी आँखें भी खोल दीं। मैंने हमेशा तुम्हें कमज़ोर समझा और तुम्हारा अपमान किया। पर आज मुझे समझ आया कि सम्मान जरूरी है, चाहे जीव कितना ही छोटा क्यों न हो। तुम्हारी एकता और मेहनत ने वह कर दिखाया जो मेरी ताकत नहीं कर सकी।"
छोटी मुस्कुराई और बोली, "महाराज, सम्मान माँगने से नहीं, देने से मिलता है। आज से अगर आप हर जीव को आदर देंगे, तो यह चंदन वन वाकई एक स्वर्ग बन जाएगा।"
उस दिन के बाद, शेरू पूरी तरह बदल गया। वह अब जंगल की सभा में हर जानवर की बात सुनता था। उसने छोटी को अपना 'विशेष सलाहकार' बना लिया। चंदन वन में अब कोई छोटा या बड़ा नहीं था, वहाँ बस सम्मान था।
कहानी की सीख (Moral)
इस कहानी से हमें यह बड़ी सीख मिलती है कि "किसी के आकार या रूप को देखकर उसकी काबिलियत का अंदाज़ा नहीं लगाना चाहिए।" सम्मान हर जीव का अधिकार है। जब हम दूसरों को आदर देते हैं, तभी हम स्वयं आदर पाने के पात्र बनते हैं। एकता और स्वाभिमान में वह शक्ति है जो दुनिया की बड़ी से बड़ी ताकत को भी झुका सकती है।
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आदर और नैतिकता के बारे में और जानने के लिए: Ethics
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